राजाजी और फूलों की घाटी के ईको-सेंसिटिव जोन का दायरा तय करने की कवायद तेज, पढ़ें पूरी खबर

राजाजी नेशनल पार्क और फूलों की घाटी के ईको-सेंसिटिव जोन का दायरा तय करने की कवायद तेज हो गई है.

देहरादून: उत्तराखंड में राजाजी नेशनल पार्क और फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क के प्रस्तावित ईको-सेंसिटिव जोन को लेकर कवायद तेज हो गई है. दोनों राष्ट्रीय उद्यानों के आसपास पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय आबादी की जरूरतों और जनभावनाओं के बीच संतुलन बनाकर जोन का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा. इसके तहत ईको-सेंसिटिव जोन का क्षेत्रफल, विस्तार, गतिविधियों के नियमन और जोनल मास्टर प्लान जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम किया जा रहा है. दोनों क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए अलग-अलग आधार पर प्रस्ताव तैयार होंगे.

कानूनी पहलुओं से जुड़ा मामला: राजाजी नेशनल पार्क के ईको-सेंसिटिव जोन का मामला कानूनी पहलुओं से भी जुड़ा है. इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप राज्य की वर्तमान स्थिति पर एक सप्ताह के भीतर जवाब तैयार कर भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. इसके लिए विधिक परामर्श लिया जाएगा. वहीं ईको-सेंसिटिव जोन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए कैबिनेट से भी मार्गदर्शन लेने की तैयारी है. प्रस्ताव में क्षेत्र के भीतर प्रतिबंधित, विनियमित और अनुमत गतिविधियों का निर्धारण महत्वपूर्ण होगा. इसके साथ ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है.

फूलों की घाटी में पर्यटन और पर्यटकों की संख्या पर रहेगा फोकस: फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क के मामले में पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन गतिविधियों को संतुलित करना महत्वपूर्ण होगा. यहां पर्यटकों की आवाजाही और क्षेत्र की वहन क्षमता को ध्यान में रखकर ईको-सेंसिटिव जोन का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा. इसके लिए संबंधित जिलाधिकारी, पर्यटन विभाग और अन्य संबंधित विभागों से जानकारी जुटाई जाएगी. क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी को देखते हुए यह तय करना महत्वपूर्ण होगा कि पर्यटन गतिविधियों का नियमन किस तरह किया जाए, जिससे प्राकृतिक वातावरण पर अनावश्यक दबाव न पड़े.

प्रतिबंधित और अनुमत गतिविधियों का होगा निर्धारण: ईको-सेंसिटिव जोन के प्रस्ताव में यह स्पष्ट करना होगा कि किन गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा, किन्हें नियमन के साथ अनुमति दी जा सकेगी और कौन-सी गतिविधियां अनुमत होंगी. इसके अलावा जोनल मास्टर प्लान और निगरानी समिति की व्यवस्था भी प्रस्ताव का हिस्सा होगी. संबंधित जिलों से रिपोर्ट प्राप्त कर इन पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा.

वहन क्षमता का आकलन: दोनों राष्ट्रीय उद्यानों के ईको-सेंसिटिव जोन का निर्धारण केवल पर्यावरणीय पहलुओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की जरूरतों को भी ध्यान में रखना होगा. ऐसे में प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया में संरक्षण संबंधी जरूरतों और स्थानीय हितों के बीच संतुलन अहम रहेगा. राजाजी पार्क के मामले में न्यायिक निर्देशों के तहत समयबद्ध जवाब भेजना और फूलों की घाटी में पर्यटन की वहन क्षमता का आकलन आगे की प्रक्रिया के प्रमुख हिस्से होंगे.

मामले में प्रमुख सचिव वन आर के सुधांशु ने अधिकारियों को दिशा निर्देश देते हुए मामले का गहनता से परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं साथ ही प्रकरण पर जरूरी कार्यवाही करने के लिए भी कहा गया है.

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