देहरादून का ऐतिहासिक परेड ग्राउंड 5 फरवरी से 8 फरवरी तक सेवा संकल्प फाउंडेशन (Sewa Sankalp Foundation) द्वारा आयोजित चार दिवसीय ‘उत्तरायणी कौथिक महोत्सव-2026’ की भव्यता का साक्षी बना इस महोत्सव ने न केवल उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया, बल्कि इसके समापन समारोह ने राज्य के नेतृत्व के प्रति एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव की नई कहानी भी लिखी।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण और समापन: चार दिनों तक चले इस उत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोक परंपराओं को जीवंत किया गया। कार्यक्रम के समापन के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अथक परिश्रम और निष्ठा की दास्तां: मंच से जनता को संबोधित करते हुए गीता धामी तब भावुक हो गईं जब उन्होंने मुख्यमंत्री के समर्पण और संघर्षों की चर्चा की। उन्होंने रुंधे गले से साझा किया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की सेवा के लिए आज तक एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली है। यह तथ्य राज्य के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

• निस्वार्थ सेवा: गीता धामी के अनुसार, मुख्यमंत्री के लिए उनके परिवार से ऊपर उत्तराखंड का विकास और यहाँ के लोगों की खुशहाली है।
• कठोर निर्णय: उन्होंने सीएम धामी द्वारा राज्य के व्यापक हित में लिए गए कड़े निर्णयों और उनकी विकासोन्मुख उपलब्धियों को जनता के सामने रखा।
• पूर्ण समर्पण: संबोधन का मुख्य संदेश यही था कि मुख्यमंत्री का जीवन पूरी तरह से उत्तराखंड की जनता को समर्पित है।
निष्कर्ष: सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह महोत्सव केवल नृत्य और संगीत का आयोजन मात्र नहीं था, बल्कि यह प्रदेश के प्रति
समर्पण की भावना को सुदृढ़ करने वाला एक मंच साबित हुआ।
गीता धामी के छलकते आंसू और उनके शब्द इस बात का प्रमाण थे कि उत्तराखंड के नेतृत्व के पीछे एक गहन तपस्या और जन-सेवा का संकल्प निहित है।
