सहकारी, समिति के कर्मचारियों का धरना आठवें दिन भी जारी, बुधवार से क्रमिक अनशन एंव सचिवालय के घेराव की घोषणा ।

पैक्स कैडर सचिव एवं कर्मचारियों का अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर निबंधक कार्यालय, मियांवाला, देहरादून में चल रहा धरना प्रदर्शन सोमवार दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को आठवें दिन भी जारी रहा। उल्लेखनीय है कि शनिवार एवं रविवार को शासकीय अवकाश होने के बावजूद हड़ताली कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में धरना स्थल पर डटे रहे। धरने के दौरान वक्ताओं ने कर्मचारियों की लंबित समस्याओं, सहकारी समितियों के भविष्य तथा सहकारिता ढांचे में पैक्स कर्मचारियों को सम्मिलित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रदेश अध्यक्ष हर्षमणि नौटियाल द्वारा धरने को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड में वर्ष 1965 से प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियां पैक्स, संचालित हो रही हैं। इन समितियों के सुचारु संचालन एवं प्रबंधन के लिए सचिवों की नियुक्ति की गई थी। सरकार इस तथ्य से भली भांति परिचित थी कि समितियों का संचालन करने वाले कर्मचारियों के वेतन एवं भत्तों की व्यवस्था आवश्यक है। इसी उद्देश्य से कैडर व्यवस्था लागू की गई तथा कर्मचारियों के वेतन भत्तों के लिए स्थायी निधि का सृजन किया गया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य के गठन के उपरांत इस व्यवस्था का समयानुकूल पुनरीक्षण नहीं किया गया। परिणामस्वरूप इतने वर्षों बाद भी पैक्स कैडर सचिव एवं कर्मचारी वेतन भत्तों की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि कर्मचारियों के वेतन भत्तों की स्थायी एवं प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए उनकी लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए।

संगठन संयोजक प्रकाश जोशी बताया कि पूर्व में ग्राम स्तर पर संचालित सहकारी समितियों को न्याय पंचायत स्तर पर व्यवस्थित करने का उद्देश्य समितियों के प्रबंधन एवं संचालन को प्रभावी बनाना था। लेकिन वर्तमान में नई एम. पैक्स समितियों का गठन किया जा रहा हैए जिसकी आवश्यकता, प्रासंगिकता तथा मौजूदा समितियों पर पड़ने वाले प्रभावों का समुचित आकलन किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सहकारिता क्षेत्र से जुड़े जानकार लोगों की आशंका है कि नई एम.पैक्स समितियों के गठन से पुरानी एवं नई दोनों समितियों के कारोबार तथा आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यदि इस विषय पर समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया गयाए तो आने वाले पांच वर्षों में सहकारिता आंदोलन के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने मांग की कि नई समितियों

के गठन से पूर्व भौगोलिक स्थिति वर्तमान समितियों के कारोबार तथा वित्तीय व्यवहार्यता का विस्तृत अध्ययन किया जाए।

उपाध्यक्ष सुमारी गौड़ एवं सुरेंद्र पाल सिंह बताया गया कि मिनी बैंकों के माध्यम से सहकारी समितियों में करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। निकट भविष्य में यदि यह कारोबार समितियों से बाहर चला जाता हैए तो इससे समितियों की जमा धनराशि एवं आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी। इसका प्रतिकूल असर जिला सहकारी बैंकों के निक्षेप पर भी पड़ सकता है, जिससे बैंकों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।

उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों एवं जिला सहकारी बैंकों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। इस दिशा में प्रभावी प्रयासों का अभाव चिंताजनक है। सरकार एवं सहकारिता विभाग को इस विषय पर गंभीरता से विचार कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

प्रदेश महामंत्री दिनेश कुमार यादव द्वारा बताया गया कि पैक्स कैडर सचिव एवं कर्मचारियों को छोड़कर सहकारी ढांचे में कार्यरत अन्य संबंधित सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की व्यवस्थाएं अलग अलग स्तरों पर निर्धारित हैं। पैक्स में कार्यरत कार्मिकों की सेवाओं के लिए स्थायी एवं स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें लंबे समय से विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड के समस्त पैक्स सचिव एवं कर्मचारियों को सहकारिता ढांचे में सम्मिलित किया जाए तथा उनकी सेवा शर्तों, वेतन भत्तों एवं भविष्य की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था लागू की जाए।

धरना स्थल पर उपस्थित महिला वक्ताओं श्रीमती मंजू उनियाल, राधा बौड़ाई एवं ऊषा ने महिला कार्मिकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य योजना एवं गोल्डन कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराने तथा महिला कार्मिकों को चाइल्ड केयर लीव, अर्थात बाल देखभाल अवकाश का लाभ प्रदान करने की मांग की।

महिला वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों एवं उनके परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ साथ महिला कार्मिकों को बच्चों की देखभाल के लिए आवश्यक अवकाश की सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने सरकार से इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया।

लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय की मांग

धरने को संबोधित करने वाले सभी वक्ताओं एवं प्रतिनिधियों ने पूर्व में प्रेषित मांग. पत्रों पर शीघ्र निर्णय लेते हुए आवश्यक शासनादेश जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का लंबे समय तक समाधान न होना उनके आर्थिक एवं सामाजिक भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेकर आवश्यक आदेश जारी नहीं किए जाते, तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।

आंदोलन के अगले चरण की घोषणा

प्रतिनिधियों ने आंदोलन को और प्रभावी बनाने के लिए घोषणा की कि बुधवार, दिनांक 14 अक्टूबर 2026 से क्रमिक अनशन प्रारंभ किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, संभावित रूप से शुक्रवार, दिनांक 16 अक्टूबर 2026 को संगठन के कर्मचारियो के साथ प्रदेश के समस्त पैक्स संचालक मण्डल के सदस्य सचिवालय घेराव किए जाने की योजना है। जिसके लिए प्रदेश किसान यूनियन का भी समर्थन प्राप्त हुआ है। इसके लिए

 

प्रशासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने तथा निर्धारित रूट चार्ट के संबंध में भी कार्रवाई की जाएगी।

प्रतिनिधियों ने प्रदेश के समस्त पैक्स सचिवों एवं कर्मचारियों से एकजुट रहकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की।

धरना प्रदर्शन में उपस्थित कर्मचारी एवं प्रतिनिधि

धरना प्रदर्शन में अरुण सोलंकी, अभिनाश, आकाश, राहुल, पिंटी, संगीता, दीपा, संगीता नेगी, बीना, ऊषा कठैत, मीनाक्षी, नेहा, योगेश, सुषमा, कंचन, रजनी, कंचन लता, उज्ज्वला, शिवानी, विजयलक्ष्मी, पूजा बिष्ट, शांति रास्ता, पूजा पंत, पारों, रुचिकर, नमिता, रीना, पूनम, दिव्या, ललिता सहित अनेक कर्मचारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

“निष्कर्ष” पैक्स कैडर सचिव एवं कर्मचारियों ने एक स्वर में मांग की कि उनकी लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए, सेवा संबंधी स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा सहकारी समितियों के आर्थिक एवं संस्थागत हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

 

 

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