पिता ने जंगल से घास-लकड़ी लाकर, हल चलाकर की पढ़ाई, साइंटिस्ट बेटी के बाद अब बेटा बना डिप्टी जेलर

गैरसैंण के डुंगरी गांव के सिरसवाल परिवार की सफलता की अद्भुत कहानी, फर्श से अर्श तक पहुंचने की मिलती है प्रेरणा

गैरसैंण: कहते हैं कि सफलता किसी की मोहताज नहीं होती. अगर मन में दृढ़ इच्छा शक्ति व कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश हो, तो कोई भी अड़चन आड़े नहीं आती. गरीबी या कठिन परिस्थितियां किसी के सपनों को रोक नहीं सकतीं. अगर इरादे मजबूत हों, तो की गई मेहनत हमेशा रंग लाती है. ये साबित कर दिखाया है सामान्य परिवार में जन्मे गैरसैंण के मनीष सिरसवाल ने. मनीष ने लोअर पीसीएस परीक्षा में बड़ी सफलता पाई है.

डुंगरी के मनीष सिरसवाल बने डिप्टी जेलर: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण तहसील स्थित डुंगरी गांव के निवासी मनीष सिरसवाल का लोक सेवा आयोग हरिद्वार उत्तराखंड द्वारा घोषित परिणाम में लोअर पीसीएस के डिप्टी जेलर के पद पर चयन होने पर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है. उनके गृह नगर गैरसैंण के क्षेत्रवासियों व जनप्रतिनिधियों ने उनके डिप्टी जेलर बनने पर खुशी जताते हुए उन्हें बधाई दी है. कड़ी मेहनत व लगन के चलते मनीष का चयन डिप्टी जेलर के पद पर हुआ है. इससे पूरा गैरसैंण क्षेत्र अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहा है.

मनीष ने लोअर पीसीएस परीक्षा की पास: अपनी सफलता का श्रेय मनीष अपने माता पिता व गुरुजनों को देते हैं. उनके पिता भोला दत्त सिरसवाल शिक्षक और माता दमयंती गृहणी हैं. बताते चलें कि, मनीष के पिता भोला दत्त सिरसवाल भी बहुत मेधावी छात्र रहे हैं.

पिता ने घर के सारे काम करने के साथ की थी पढ़ाई: सिर से पिता का साया जल्द उठ जाने व आय का कोई भी साधन नहीं होने के बावजूद भोला दत्त सिरसवाल हर रोज जंगल से घास और लकड़ी लाने के साथ कास्तकारी और घर का काम करके गांव से रोजाना 14 किलोमीटर पैदल चल कर गैरसैंण इंटर कॉलेज पढ़ने आया करते थे. उन्होंने कहा कि आज उनकी तपस्या पूरी हुई है. मनीष के पिता भोला दत्त सिरसवाल अपने बेटे की इस सफलता को लेकर काफी उत्साहित हैं. उन्होंने बताया कि मनीष शुरू से ही बहुत मेहनती हैं व मेधावी छात्र रहे हैं.

बचपन से मेधावी रहे मनीष: बताते चलें कि गरीब परिवार में जन्मे मनीष सिरसवाल की प्राथमिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर गैरसैंण से हुई. कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई सरस्वती विद्या मंदिर गैरसैंण से की. 10वीं में मनीष ने 93 फीसदी अंक अर्जित कर बोर्ड में 18वीं रैंक प्राप्त की थी. 12वीं में 90 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे. बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के इस मेधावी छात्र ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी ऑनर्स फिजिक्स में 75 फीसदी अंक के साथ ग्रेजुएशन किया. उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी से एमए में 90 प्रतिशत अंक लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन किया.

मनीष की दीदी हैं वरिष्ठ वैज्ञानिक: 23 वर्षीय मनीष की सफलता क्षेत्र के युवाओं को निश्चित रूप में प्रेरणा का स्रोत बन कर नई प्रतिभाओं को आगे लाने में मददगार साबित होगी. बताते चलें कि, पूर्व में भोलादत्त सिरसवाल की बेटी   के पद पर नियुक्त होकर पूरे चमोली जनपद को गौरवान्वित कर चुकी हैं. निधि अभी वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं.

विधायक समेत अनेक लोगों ने जताई खुशी: मनीष की इस सफलता पर कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के विधायक अनिल नौटियाल, पूर्व राज्य मंत्री सुरेश कुमार बिष्ट, नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी, ब्लॉक प्रमुख दुर्गा रावत, भाजयुमो के जिला अध्यक्ष पंकज गैड़ी, वरिष्ठ पत्रकार प्रेम संगेला, मनीष के भाई वरिष्ठ शिक्षक जगदीश प्रसाद ढौंडियाल सहित तमाम जनप्रतिनिधियों व क्षेत्रवशियों ने बधाई व शुभकामनाएं दी हैं.

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